भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार, आज 13 फरवरी को मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक नया और अत्यंत शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में दस्तक दे चुका है। इस मौसमी तंत्र का व्यापक असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखने लगा है। राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में बादलों की आवाजाही के साथ बारिश और ओलावृष्टि (Hailstorm) की संभावना काफी बढ़ गई है।
आज 13 फरवरी को जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली, लाहौल-स्पीति और चंबा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात (Snowfall) होने की उम्मीद है। इसके साथ ही उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के पहाड़ी इलाकों में भी बर्फबारी का दौर जारी रहेगा।
मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में आज गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है और कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है। राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी जिलों जैसे जयपुर, अलवर और श्रीगंगानगर में आज बारिश की गतिविधियां सक्रिय रहेंगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे मेरठ, मुजफ्फरनगर, आगरा और झांसी में आज बारिश की प्रबल संभावना है। कल 14 फरवरी को यह मौसमी सिस्टम आगे की ओर बढ़ेगा और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर तक अपनी पहुंच बनाएगा। बिहार के पटना, सिवान और चंपारण जैसे इलाकों में भी कल हल्की बारिश होने की संभावना है, जिससे मौसम में ठंडक बढ़ेगी। हालांकि, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रह सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही यह सिस्टम उत्तर भारत से आगे निकलेगा, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं एक बार फिर से मैदानी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करेंगी। इसके परिणामस्वरूप:
मौसम की हलचल के बीच सराफा बाजार से भी बड़ी खबर आ रही है। सोने और चांदी की कीमतों ने आज सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, सोने की कीमत ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण कीमतों में यह भारी उछाल देखा जा रहा है।
आगामी 72 घंटे कृषि कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। किसान भाई इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
अस्वीकरण (Disclaimer): यह मौसम अपडेट वर्तमान उपग्रह चित्रों और विशेषज्ञों के विश्लेषण पर आधारित है। मौसम की तात्कालिक स्थिति में बदलाव संभव है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और मौसम केंद्रों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।









