देशभर में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई और प्रशासनिक देरी के बीच २०२६ की शुरुआत कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। तेलंगाना हाई कोर्ट के एक महत्वपूर्ण रुख और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा लिए गए फैसले ने लाखों कर्मचारियों की उम्मीदों को नया जीवन दिया है।
तेलंगाना हाई कोर्ट के दो न्यायाधीशों के पैनल ने वर्ष १९९९ की अधिसूचना के तहत नियुक्त कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
उत्तर प्रदेश सरकार के नए आदेश के अनुसार, केवल नियमित कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कुछ विशेष स्थितियों में निम्नलिखित को भी राहत मिल सकती है (नियमों के सत्यापन के अधीन):
२०२४ और २०२५ में OPS के लिए चली रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के बाद, कोर्ट के ये निर्देश और राज्य सरकारों के चुनिंदा फैसले अन्य राज्यों के लिए भी नजीर बन सकते हैं। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि जिन कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया NPS लागू होने से पहले शुरू हो गई थी, उन्हें OPS का विकल्प देने के लिए कानूनी रास्ता खुल रहा है।
OPS पर हाई कोर्ट का ताजा रुख उन हजारों कर्मचारियों के लिए आशा की किरण है जो प्रशासनिक सुस्ती के कारण NPS के जाल में फंस गए थे। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा १५४ प्रोफेसरों को दी गई मंजूरी इस दिशा में एक ठोस शुरुआत है। यदि आप भी ऐसी ही स्थिति में हैं, तो अपने विभाग के विज्ञापनों और कोर्ट के इन फैसलों का अध्ययन जरूर करें।









