फरवरी २०२६ की शुरुआत मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय तेल कंपनियों ने घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने का फैसला किया है। पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ रसोई गैस (LPG) की कीमतों में भी कोई बड़ा उछाल न आने से आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ा है।
देश की प्रमुख तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने आज सुबह ६:०० बजे ईंधन के नए रेट अपडेट किए हैं। फरवरी २०२६ में कीमतों के स्थिर रहने का सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट सेक्टर को मिल रहा है। यदि ईंधन के दाम बढ़ते हैं, तो माल भाड़ा बढ़ जाता है, जिससे सीधे तौर पर फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो जाती हैं।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल के दाम (प्रति लीटर):
डीजल की स्थिति: दिल्ली में डीजल ₹87.62 प्रति लीटर पर स्थिर है, जबकि मुंबई में यह ₹89.76 के आसपास बना हुआ है। डीजल के दाम स्थिर रहने से किसानों को ट्रैक्टर चलाने और माल ढुलाई करने वाले ट्रक ड्राइवरों को बड़ी राहत मिली है।
वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें फिलहाल ७० से ७५ डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही हैं। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति मजबूत होने के कारण तेल का आयात बहुत महंगा नहीं पड़ा है। सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी और वैट (VAT) को नियंत्रित रखा है, जिससे कीमतें आसमान नहीं छू रही हैं।
रसोई गैस की कीमतों में स्थिरता महिलाओं के लिए रसोई बजट को नियंत्रित रखने में सहायक साबित हो रही है।
केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के तहत लगभग १० करोड़ परिवारों को बड़ी राहत दी जा रही है। इस योजना के पात्र लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में मिलती है। इससे गरीब परिवारों को रसोई गैस काफी सस्ती दरों पर उपलब्ध हो रही है, जिससे उन्हें धुएं वाले चूल्हे से मुक्ति मिली है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा राजनीतिक तनाव नहीं होता है, तो मार्च २०२६ तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इसी तरह की स्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर तेल कंपनियां प्रतिदिन अपनी समीक्षा जारी रखती हैं।
फरवरी २०२६ में ईंधन और गैस की कीमतों में स्थिरता महंगाई पर लगाम लगाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। यह न केवल आम आदमी के घर का बजट सुधारेगा, बल्कि बाजार में अन्य वस्तुओं की कीमतों को भी स्थिर रखने में मदद करेगा









